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विश्लेषण

कार्ल सेगन: आज तक के सबसे बड़े खगोल-शास्त्री हिंदू धर्म से प्रेरित थे

कार्ल सेगन हिंदू

१४ फरवरी १९९० को जब वायेजर-१ दूर अंतरिक्ष में पृथ्वी से ६ अरब किलोमीटर की दूरी पर था, तब कार्ल सेगन (प्रतिष्ठित खगोलविद और पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक) के सुझाव पर पृथ्वी का एक फोटो लिया गया था। उस चित्र में, पृथ्वी को बिखरे हुए प्रकाश के बीच एक बिंदु सामान दर्शाया था। चित्र से प्रेरित होकर कार्ल सेगन ने उस बिन्दु पर एक किताब ‘पेल ब्लू डॉट‘ लिखी थी, जिसमें उन्होंने उल्लेख किया कि विशाल ब्रह्माण्डीय क्षेत्र की तुलना में पृथ्वी बहुत छोटी है। यह इस महान ब्रह्मांड में एक छोटे से कण जैसा है। ब्रह्मांड एक ऐसा शब्द है जिसके बारे में जानकारी बच्चों और वयस्कों को प्रेरित करती है। वह कोई अज्ञानी ही होगा जो यह कहेगा कि वह ब्रह्मांड के बारे में सब कुछ जानता है। यह इतना गहरा है कि ब्रह्मांड के साथ इसकी अनेक व्यवस्थाएं भी सुसज्जित है।

तो, कॉसमॉस वास्तव में क्या है? कॉसमॉस, ब्रह्मांड का एक जटिल सार्वभौमिक समूह है जो एक व्यवस्थित आकार में चल रहे एक या एक से अधिक ब्रह्मांड को घेरे हुए है। इसमें समय, स्थान, पदार्थ और प्राकृतिक सिद्धान्त शामिल होते हैं जो उन्हें नियंत्रित करते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार त्रिदेव ब्रह्मांड के संतुलन को बनाए रखते हैं। इसमें, भगवान ब्रह्मा जो ब्रह्मांड के निर्माता हैं, भगवान विष्णु जो इसे संरक्षित करते हैं और शिव जो इसे नष्ट करते हैं, शामिल हैं। हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि ब्रह्माण्ड क्रमानुगत रूप से बनाया गया है। यह एक कभी न खत्म होने वाला चक्र है। तत्त्वविज्ञान यह है कि ब्रह्मांड कभी किसी विशेष बिंदु पर अस्तित्व में नहीं आया था, यह हमेशा से वही था और यह हमेशा, अनंत काल तक रहेगा। अंतरिक्ष और समय प्रकृति में चक्रीय होते हैं; ब्रह्मांड भी लगातार बदल रहा है।

जब वर्तमान ब्रह्माण्ड का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, तब एक नया ब्रह्मांड उसकी जगह ले लेगा। दिलचस्प है कि यह धारणा “बिग बाउंस” परिकल्पना से मेल खाता है।

Carl Sagan Hinduism

सेगन के किताब से

बिग बाउंस एक काल्पनिक ब्रह्माण्ड संबंधी मॉडल है जो यह बताता है कि बिग बैंग पिछले कुछ ब्रह्मांडों के पतन का परिणाम था। भौतिकविदों का मानना है कि ब्रह्मांड संकुचन और विस्तार के चक्र से गुजरता है। मुख्य विचार यह है कि चूंकि घनत्व अनंत होने पर क्वांटम फोम के व्यवहार में परिवर्तन होता है जिसके फलस्वरूप प्रकाश की गति जैसे भौतिक स्थिरांक में परिवर्तन होता है। क्वांटम सिद्धांत में क्वांटम फोम ब्रह्मांड के बनावट की नींव है। हालांकि, सिद्धांत वर्तमान विस्तार ब्रह्मांड के संकुचन की व्याख्या नहीं करता है।

भगवान शिव से जुड़े नृत्य के दो रूप हैं, लास्य और तांडव। ब्रह्मांड के निर्माण के साथ लास्य जुड़ा हुआ है, जबकि तांडव ब्रह्मांड के विनाश से संबंधित है। राक्षस जिसके ऊपर शिव नृत्य करते हैं वह अज्ञानता का प्रतीक है, जबकि ज्वाला ब्रह्मांड को प्रकट करती हैं। अपनी कमर के चारों ओर घूमता हुआ सांप कुंडलिनी का प्रतीक है जो कि ऊर्जा का एक रूप है, ऐसा कहा जाता है कि यह प्रत्येक व्यक्ति की रीढ़ की हड्डी के आधार पर स्थित होता है। यह माना जाता है कि योग, ध्यान और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों का अभ्यास करके रीढ़ की हड्डी में स्थित उर्जा को प्राप्त किया जा सकता है और आध्यात्मिक ज्ञान की राह को खोला जा सकता है। इसके अलावा, भगवान शिव के चार हाथ हैं जिन में ऊपरी दाहिने हाथ में डमरू रहता है जो ब्रह्मांड के निर्माण के दौरान ध्वनि उत्पन्न करता है। ऊपरी बाएं हाथ में आग है जो विनाश का प्रतीक है। दूसरा बांया हाथ मुक्ति का प्रतीक है और दूसरा दाहिना हाथ निडरता की स्थिति का प्रतीक है। २००४ में जिनेवा में सेंटर फॉर रिसर्च इन पार्टिकल फिजिक्स (सीईआरएन) में एक नटराज की प्रतिमा को रखा गया था। यह भारतीय सरकार ने, अपने साथ साथ एक लंबे सहयोग का जश्न मनाने के लिए अनुसंधान केंद्र को भेंट दी थी।

कार्ल सेगन हिंदुत्व और हिंदू कॉस्मिक दर्शन पर इतने मोहित थे किस्पेस एक्सप्लोरेशन के उद्देश्य के लिए उनके द्वारा डिजाइन की गई एक टीवी श्रृंखला कॉसमोस, का एक हिस्सा भारत में फिल्माया, और कार्ल सेगन इस श्रृंखला के हिस्से को फिल्माने के लिए स्वयं यहाँ भारत में आये थे।

यह श्रृंखला इतनी सफल हुई कि यह सोवियत संघ और चीन तक में प्रसारित की गई थी। वह स्वयं हिन्दू ब्रह्माण्ड विज्ञान के अरब-वर्ष के समय के पैमाने पर विश्वास करते थे। हिंदू धर्म में यह पैमाना सामान्य रात और दिन से लेकर ब्रह्मा के दिन और रात से भिन्न होता है जो कि ८.४ अरब वर्ष का है। वैज्ञानिकों के अनुसार धरती ४.६ अरब वर्ष पुरानी है। प्राचीन धर्म ने उन प्रश्नों का समाधान किया है जो पश्चिमी शोधकर्ताओं द्वारा अप्राप्य थे। यह विज्ञान और आध्यात्मिकता को सुन्दरता से संजोता है। जबकि ईसाई धर्म जैसे कुछ धर्मों ने विज्ञान का विरोध किया है और उन लोगों को सताया है जिन्होंने इसका प्रचार किया है; हिंदू धर्म के नाम पर वैज्ञानिक मान्यताओं को छति पहुचाने की कोई भी घटना नहीं है। आज भी, हिंदू धर्म के पास अनोखी पहेलियाँ सुलझाने की क्षमता है, लेकिन इनको सुलझाने के लिए किसी को खुले दिमाग के साथ गहनता से जवाब खोजने की आवश्यकता है।

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