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एक रॉकेट, हर महीने: इसरो का नए साल का संकल्प

इसरो रॉकेट

MOM ऑर्बिटल मिशन यानी कि मंगल अभियान से लेकर एक साथ सौ से ज्यादा उपग्रहों के प्रक्षेपण और पुन: उपयोगी प्रक्षेपण यान कार्यक्रम से ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) नई ऊँचाइयों को छू रहा है। उनके नये साल का संकल्प बड़ा ही अद्भुत है।

ऐसा लगता है कि 104 उपग्रहों को एक साथ प्रक्षेपित करने की अद्वितीय उपलब्धि इसरो की तकनीकी भूख को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी, इसलिए अब उन्होंने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से वर्ष २०१८ में हर महीने एक नया रॉकेट प्रक्षेपित करने की योजना बनाई है

बिज़नेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसरो के अध्यक्ष ए.एस. किरण कुमार ने कहा कि, “हम २०१८ में हर महीने में कम से कम एक रॉकेट प्रक्षेपण अभियान की योजना बना रहे हैं ताकि विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह तैनात किये जा सकें।

उन्होंने बेंगलुरु में विश्वेश्वरैय्या औद्योगिक और तकनीकी संग्रहालय में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की गैलरी के उद्घाटन के अवसर पर प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि “वित्तीय वर्ष २०१८-१९ और २०१९-२० में अभियानों को ध्यान में रखते हुए, हम देश से ज्यादा बजट प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे हैं।”

बजट में यह वृद्धि अंतरिक्ष अनुसंधान और विकास के लिए मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

जनवरी २०१८ के शुरुआत में २८ नैनो और छोटे उपग्रहों के साथ कार्टोसैट-२ई रिमोट सेंसिंग एयरक्राफ्ट, इसरो द्वारा प्रक्षेपित किया जाने वाला पहला उपग्रह होगा।

कार्टोसैट -२ई उपग्रह एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है जिसे शहरी नियोजन, बुनियादी ढांचे का विकास, उपयोगिता योजना और यातायात प्रबंधन में उपयोग के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन की छवियां एकत्रित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

जल्द ही कार्टोसैट -२ई के प्रक्षेपण के बाद, चंद्रयान -२ के प्रक्षेपण को अंतिम रूप दे दिया जाएगा, यह २०१८ की पहली तिमाही में लॉन्च किया जाएगा।

चंद्रयान -२ जो कि चंद्रमा पर भारत का दूसरा अभियान है, पहले की तुलना में अधिक उन्नत है। इस अभियान के तीन अंग हैं; ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर। इसरो चंद्रयान-२ के लिए GSLV MKII रॉकेट का उपयोग करने की योजना बना रहा है और इसे २०१८ के पहले कुछ महीनों में ही अंतरिक्ष एजेंसी के श्रीहरिकोटा के उच्च ऊंचाई क्षेत्र में स्थित प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपित किया जायेगा।

चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऑर्बिटर को तैनात किया जाएगा। उसके बाद लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जायेगा और चंद्रमा की सतह पर उतर जायेगा। लैंडर, रोवर और ऑर्बिटर चन्द्रमा की सतह का खनिज सम्बन्धी और तात्विक अध्ययन करेंगे।

इसरो, टीम Indus के साथ मिलकर भी काम कर रहा है ये भारतीय टीम ३० मिलियन डॉलर के गूगल लूनर एक्सप्राइज के लिए फाइनल ५ प्रतिभागी टीमों में से एक है। प्रतियोगिता के लिए ३१ मार्च २०१८ से पहले इसरो, टीम Indus द्वारा डिजाइन किये गये एक ६०० किलोग्राम के अंतरिक्ष यान को अपने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) से प्रक्षेपित करने के लिए काम कर रहा है।

इस तरह के ऊंचे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अत्यधिक अनुशासन और कड़ी मेहनत की आवश्यकता होती है और इसरो ये बार बार करता आ रहा है।

इसरो प्रमुख ने कहा, “विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में कुछ भी करने के लिए अभी कोई देरी नहीं हुई है। हम हमेशा ही अपनी एक छाप बना सकते हैं। जब हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हैं तब हमें कोई भी हरा नहीं सकता।” उनके शब्द रचनात्मक दृष्टिकोण और सकारात्मक मानसिकता को दर्शाते हैं।

इसरो को अनेक अनेक शुभकामनाएं  और बधाइयां!

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