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भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मालदीव को दिखाई उसकी सही जगह

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद

भारत ने मोदी सरकार के अंतर्गत अपनी मजबूत और दृण विदेश नीति जारी रखी है। भारत आर्थिक शक्ति के रूप में उभरा है जो वैश्विक स्तर पर अपनी लोकप्रियता का आनंद उठा रहा है और मजबूत राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ अपने संघर्ष के आधार पर एक मुखर और प्रभावशाली विदेशी नीति को तैयार कर रहा है। हाल ही में हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के गैर-स्थायी चुनावों के दौरान सबकी निगाहें भारत पर थीं।

इंडोनेशिया और मालदीव के बीच गैर-स्थायी सीट के लिए कड़ी टक्कर थी। भारत और मालदीव के बीच के रिश्ते में काफी खटास भर गयी है, मालदीव में जारी राजनीतिक संकट के साथ संदिग्ध चीन के प्रभाव ने दोनों देशों के बीच के रिश्ते में दरार डाल दी है। भले ही दोनों देश इतिहास में अच्छे संबंधों को साझा करते हैं जिन्हें हमेशा ही एक दूसरे के सहयोगी के रूप में देखा जाता हो लेकिन हाल के समय में मालदीव भारत के हितों के खिलाफ लगातार काम कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुई गैर-स्थायी चुनाव में मालदीव ये दावा कर रहा था कि चुनाव में भारत ने उसे अपना समर्थन दिया है। हालांकि, विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक मालदीव को शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ा है क्योंकि भारत ने न केवल मालदीव के खिलाफ वोट किया बल्कि ये सुनिश्चित भी किया कि उसके पड़ोसी देश मालदीव का चुनाव में प्रदर्शन फीका रहे

राजनयिक स्रोतों के मुताबिक, भारत ने अपने पड़ोसी देश मालदीव का चुनाव में प्रदर्शन फीका सुनिश्चित करने के लिए कार्य किया। नतीजतन गैर-स्थाई सीट पर इंडोनेशिया के हाथों मालदीव को हार का सामना करना पड़ा। इस बड़ी जीत में इंडोनेशिया को बहुमत के लिए जरूरी 127 से अधिक 144 देशों का साथ मिला जबकि मालदीव को सिर्फ 44 देशों का ही साथ मिला। ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत ने मालदीव के खिलाफ वोट कर ऐसी जगह वार किया है जहां मालदीव को सबसे गहरी चोट लगी है। कई देशों ने मालदीव के खिलाफ सिर्फ इसलिए वोट किया क्योंकि भारत ने पहले ही मालदीव के खिलाफ वोट देने और इंडोनेशिया के पक्ष में वोट देने के संदेश दे दिए थे जिसने हवा का रुख मालदीव के खिलाफ कर दिया। एक समय मालदीव ने दावा किया था उसे 60 देशों का लिखित में समर्थन हासिल है जबकि 30 से ज्यादा देशों ने मौखिक तौर पर वोट देने की बात कही है अब भारत ने मालदीव के इस दावे को हिलाकर रख दिया है क्योंकि चुनाव में मालदीव का समर्थन आधार आधे से भी कम रहा गया था।

भारत के हितों के खिलाफ सक्रीय रूप से काम करने के बाद भी मालदीव को यकीन था कि भारत उसे अपना समर्थन देगा। एक के बाद एक गलत निर्णयों के साथ मालदीव ने खुद ही विवादों को जन्म देकर भारत को खुद से दूर कर दिया। इसी साल अप्रैल में मालदीव ने भारत को अपमानित करते हुए तोहफे में दिए दोनों हेलीकॉप्‍टर वापस ले जाने के लिए कहा था। चीन की ओर झुकाव वाली यामिन सरकार ने मालदीव में भारतीय कामगारों को बिजनेस वीजा और वर्क परमिट जारी करना बंद करके एक और बड़ी गलती की। इस तरह के शत्रुता वाले रवैये के बावजूद मालदीव को पूरा यकीन था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी चुनाव में भारत उसका समर्थन करेगा। हालांकि, भारत ने मालदीव को न सिर्फ जोर का झटका दिया बल्कि ये सुनिश्चित किया कि मालदीव का प्रदर्शन कमजोर रहे जिससे मालदीव को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।

ये संयुक्त राष्ट्र चुनाव भारत की मजबूत विदेश नीति को दर्शाता है। कोई कुछ कर नहीं सकता लेकिन सराह सकता है कि कैसे भारत ने इस छोटे से द्वीप वाले राष्ट्र को उसकी सही जगह दिखाई है। मालदीव लगातार भारत के हितों एक खिलाफ कार्य करके भारत को परेशान कर रहा था और अब अपनी गलती के लिए इस देश को भारी भुगतान करना पड़ा है। इससे स्पष्ट है कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे देश में रूप में उभर रहा है जिसकी विदेश नीति समय के साथ और शक्तिशाली हो रही है।

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