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अरुण जेटली ने राजकोषीय घाटे को कैसे कम किया

अरुण जेटली
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अरुण जेटली भारत के सबसे सफल वित्त मंत्री में से एक हैं। उन्होंने भारतीय लोगों के आर्थिक व्यवहार के साथ आर्थिक सिद्धांत को जोड़कर नई नीतियां बनाई और कार्यान्वयन भी किया। वित्त मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल देश के सार्वजनिक वित्त में सबसे सफल रहा है। वो जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को लागू करने में सफल रहे हैं जो कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण दशकों से फंसा हुआ था। नोटबंदी जैसे बड़े फैसले ने देश की आर्थिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने और काले धन के लेनदेन पर नकेल कसने में काफी सफल रहा। दिवालियापन और दिवालियापन संहिता (आईबीसी) को इस समस्या को हल करने और कंपनियों को घाटे के त्वरित निकास को सुनिश्चित करने के लिए लागू किया गया था।

भारत की आर्थिक व्यवस्था की गति धीमी हो रही थी और महंगाई दर लगभग ढाई के आंकड़े पर चली गयी थी और राजकोषीय घाटा 4.5 प्रतिशत था। कुल मिलाकर देश की आर्थिक स्थिति में अस्थिरता थी लेकिन उन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल में देश की आर्थिक स्थिति में बड़े बदलाव किये और अब दुनिया भर के लोगों और संस्थानों द्वारा देश की स्थिर मैक्रोइकॉनोमिक व्यवस्था की सराहना की जा रही है। महंगाई दर घटकर 3.08 फीसदी हो गया है और राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.5 प्रतिशत है। देश के इज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में सुधार हुआ है और ये अब तक के सबसे अच्छे स्तर पर है। वैश्विक निवेशक अब भारत को निवेश के लिए सबसे बढ़िया बाज़ार मानते हैं। यहां महत्वपूर्ण सवाल ये है कि कैसे जेटली कॉर्पोरेट करों में कमी के बावजूद अपनी नीतियों और प्रयासों से भारत की महंगाई दर और राजकोषीय घाटे को कम करने में कामयाब हुए हैं।

राजकोषीय घाटे को दो तरीकों से कम किया जा सकता है, पहला, ज्यादा कर का संग्रह करके और दूसरा खर्चे कम करके , जेटली ने दोनों तरीकों का उपयोग किया।  कॉर्पोरेट आय कर / जीडीपी अनुपात के कम होने के बावजूद वित्त वर्ष 2014 में जीडीपी अनुपात में केंद्र का सकल कर वित्त वर्ष 2014 में 10.1% से बढ़कर 11.6% हो गया। ये वृद्धि आयकर संग्रह में तेजी के कारण था। सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात के रूप में आय पर कर वित्त वर्ष 2014 में 2.1% से बढ़कर वित्त वर्ष 2018 में 2.6% हो गया। सरकार ने उच्च आयकर स्लैब पर अधिभार लगाया और कुल टैक्स देने वाले की संख्या को भी बढ़ाया।  ज्यादा लाभ “अन्य करों” से आए हैं, मुख्य रूप से अप्रत्यक्ष कर जैसे उत्पाद शुल्क और सेवा कर, और अब जीएसटी से ये लाभ मिल रहा है। ये वित्त वर्ष 2014 में जीडीपी का 4.5% से बढ़कर 2018 में जीडीपी का 5.7% हो गया।

अरुण जेटली

ऐसे में अतरिक्त कर (सकल घरेलू उत्पाद का 1.5% की वृद्धि) कहा गया गया? राज्य सरकार के साथ हिस्से को 32 प्रतिशत से 42 प्रतिशत तक बढ़ाने में वित्त आयोग के निर्णय के कारण केंद्र सरकार को राज्यों के साथ कुछ हिस्सा साझा करना होता है। इसलिए कुछ हिस्सा राज्यों के साथ साझा करने के बाद, केंद्र के लिए शुद्ध कर राजस्व में वृद्धि, वित्त वर्ष 2014 में सकल घरेलू उत्पाद का 7.3% से सकल घरेलू उत्पाद का 7.3% से वित्त वर्ष 2018 में सकल घरेलू उत्पाद का 7.6% था, हालांकि  इस साल और ज्यादा के उछाल की उम्मीद की जार रही है। चूंकि केंद्र द्वारा एकत्रित अतिरिक्त राशि राज्यों के पास जाती है, ऐसे में केंद्र ने राजकोषीय घाटे को 0.9 प्रतिशत तक कैसे कम किया? खैर, 0.3 प्रतिशत कुल कर राजस्व में वृद्धि से है और बाकी खर्चों में कमी के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है। लेकिन फिर ये सवाल उठता है कि अगर सरकार ने व्यय घटाया तो सड़कों और पुलों और अन्य सार्वजनिक कार्यों के निर्माण में भारी धन का निवेश कैसे किया गया। ये पैसा वित्त सब्सिडी के अनुकूलन से आया था जो वर्ष 2014 में जीडीपी का 0.3 प्रतिशत से जीडीपी का 2.3 प्रतिशत से घटकर जीडीपी का 1.6 प्रतिशत से नीचे आ गया था, खासकर इस दिशा में पेट्रोल और डीजल पर सब्सिडी वापस लेने के लिए सरकार का धन्यवाद। इन्हीं वजहों से खर्च करने के तरीकों में बदलाव आया। तेल की कीमतों में गिरावट ने सरकार ने सब्सिडी को बुनियादी ढांचे में पैसा निवेश करने के लिए की सुविधा प्रदान की।

पिछले चार वर्षों में लोगों ने अधिक कर का भुगतान किया, उनकी सब्सिडी कम हुई और सरकार राजकोषीय घाटे को कम करने, राज्यों के साथ अधिक पैसा साझा करने और बुनियादी ढांचे पर खर्च में वृद्धि करने में सक्षम रही है। अरुण जेटली ने नोटबंदी और जीएसटी के आर्थिक झटकों के बावजूद भी सकारात्मक बदलाव किये थे। इसीलिए ये डाटा ये साबित करते हैं कि अरुण जेटली अभी तक के बेहतरीन वित्त मंत्री हैं और उनके द्वारा किये गये योगदान हमेशा याद किये जायेंगे।

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Engineering grad but Humanities and social sciences are my forte. Avid reader of religious Scriptures (Especially Hindu), Lord Shiva devotee
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