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विश्लेषण

योगी सरकार ने 50 वर्ष से अधिक के सुस्त कर्मचारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट देने के दिए आदेश

योगी अनिवार्य रिटायरमेंट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार नहीं बल्कि कई बार ये साबित किया है कि वो एक काबिल मुख्यमंत्री हैं और वो राज्य के लिए कोई भी सही और सख्त कदम उठाने से पहले दो बार नहीं सोचते हैं। जबसे वो सत्ता में आये हैं उन्होंने उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की दिशा में कई बेहतरीन निर्णय लिए हैं जो प्रदेश में भ्रष्टाचार, कानून विरोधी और अपराधियों पर नकेल कसने में काफी हद तक सफल साबित हुए हैं। एक और बड़े कदम के तहत उनकी सरकार उत्तर प्रदेश के 50 साल और उससे अधिक उम्र के नौकरशाहों को अनिवार्य रिटायरमेंट देने पर विचार कर रही है। ये नियम  1986 में ही बनाये गये थे लेकिन किसी ने भी इसे लागू करने की हिम्मत नहीं दिखाई। नौकरशाह जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है उनकी स्क्रीनिंग होगी जिसमें उनकी कार्यदक्षता और उनके प्रदर्शन की रिपोर्ट हेड डिपार्टमेंट को 31 जुलाई तक सौंपी जाएगी। यदि उनका प्रदर्शन असंतुष्ट पाया गया तो उन्हें रिटायर होने के लिए कहा जायेगा।

यूपी के अपर मुख्य सचिव मुकुल सिंघल ने कहा, “आप सभी (विभागों के प्रमुख) को 31 जुलाई तक अनिवार्य रिटायरमेंट के लिए 50 वर्ष से अधिक के सभी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग पूरी करनी होगी। यानी कि 50 वर्ष से अधिक के सभी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग की तय सीमा 31 जुलाई है।” इस निर्देश में आगे कहा गया कि, “जो कर्मचारी 50 वर्ष से अधिक की उम्र पार कर चुके हैं उन्हीं की स्क्रीनिंग की जाएगी।” इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार, ये आदेश नियमों के अनुसार दिए गए हैं, कोई भी सरकारी कर्मचारी-चाहे वो स्थायी हो या अस्थाई- उन्हें रिटायर किया जा सकता है। इस आदेश से लगभग चार लाख कर्मचारी सीधे प्रभावित होंगे।

सरकारी कर्मचारियों को ये आदेश रास नहीं आया। वो अनिवार्य रिटायरमेंट  के फैसले को सरकारी कर्मचारियों के शोषण के रूप में देख रहे हैं। यूपी के  सचिवालय कर्मी एसोसिएशन के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र ने कहा कि, इसे बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।” उन्होंने ये भी कहा कि, यदि सरकार इस फैसले की दिशा में आगे बढ़ती है तो कर्मचारी हड़ताल करेंगे।“

कोई भी नए बदलाव और सुधार का विरोध वही वाही करता है जो बदलाव की इच्छा नहीं रखते हैं। ये एक उत्कृष्ट कदम है जो आत्मसंतुष्ट और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों को हटाकर नए और ईमानदार कर्मचारियों की बढ़ोतरी करेगा और सरकारी कार्य में भी तेजी आएगी जो प्रदेश और जनता दोनों के लिए बेहतर होगा। यदि इसे सख्ती से लागू कर दिया जाता है तो इस कदम से जवाबदेही भी बढ़ेगी। लोग सरकारी नौकरी के पीछे भागते हैं एक बेहतर जीवन और नौकरी को सुरक्षित करने के लिए क्योंकि वो जानते हैं कि सरकारी नौकरी में जवाबदेही शून्य है और एक बार आप सरकारी नौकरी पा लेते हैं तो आप अपना जीवन सुरक्षित समझते हैं। ऐसे में कार्यों को पूरा करने के लिए उत्साह की कमी होती है और यही प्रमुख कारणों में से एक है जिसकी वजह से सरकारी दफ्तरों में कार्यों को बेहतर तरीके से पूरा नहीं किया जाता है। इस समस्या को सुलझाने के लिए सीएम योगी द्वारा उठाया गया कदम लाभदायक साबित होगा।

ये एक बेहतरीन कदम है जो शून्य-जवाबदेही, लाल-फीताशाही और भ्रष्टाचार से पीड़ित नौकरशाहों के कार्य करने के तरीके में सुधार लायेगा। इससे पहले, योगी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को दफ्तर में निर्धारित समय पर पहुंचने का निर्देश दिया था। उन्होंने ये स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार भ्रष्ट और खराब परफॉरमेंस वाले कर्मचारियों को बर्दाश्त नहीं करेगी।

सीएम योगी उन नेताओं में से एक हैं जो आज के समय में प्रदेश सुधार की दिशा में किसी भी बड़े निर्णय को लेने में जरा भी नहीं डरते। धीमी गति से कार्य करने वाले नौकरशाहों पर उनके इस बड़े फैसले से देश के नौकरशाहों में बदलाव आएगा। ये अन्य राज्य सरकारों के लिए ये बेहतरीन उदाहरण स्थापित करेगा।

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