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विश्लेषण

आशु भाई गुरूजी मामला: मीडिया ने जानबुझकर हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए एक ढोंगी को बताया ‘साधू’

आशु भाई गुरूजी

एक और आशु भाई गुरूजी नाम का ढोंगी बाबा पुलिस की गिरफ्त में आ गया है जिसे पुलिस ने साउथ दिल्ली के हौज़खास जैसे पॉश इलाके से गिरफ्तार किया है। इस बाबा पर एक महिला और उसकी 16 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म करने का आरोप है। वो लोगों को उनके भविष्य को बदलने का झांसा देकर उन्हें परामर्श देता था और इसके बदले मोटी रकम कमाता था।

जब इस बाबा का ढोंग सामने आया तो बिना देरी किये मीडिया ने ये खबर दिखानी शुरू कर दी कि हिंदुओं के एक और बाबा के ढोंग का हुआ खुलासा और तरह तरह की खबरें दिखानी शुरू कर दी। इसके बाद जांच एजेंसियों की जांच में जो खुलासा हुआ उसने सभी को चौंका कर रख दिया। वास्तव में आशु भाई गुरूजी का वास्तविक नाम ‘आसिफ खान’ है और इसकी गवाही वोटर लिस्ट दे रही है जिसमें आशु भाई की तस्वीर लगी है और उसके आगे लिखा हुआ है आसिफ खान पुत्र श्री इदहा ख़ान। इसका मतलब ये है कि आशु भाई गरूजी एक मुस्लिम है जो आशु बाबा बनकर भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ करता था। वहीं, इस सच में मीडिया के उस पक्ष को भी उजागर कर दिया जो जल्दबाजी में अधूरी खबर को प्रकाशित करती हैं।

पुलिस की जांच के मुताबिक, पिछले हफ्ते हौजखास पुलिस थाने में पीड़ित महिला ने आशु बाबा के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। एफआईआर दर्ज होने के बाद आशु बाबा उर्फ आसिफ खान फरार हो गया जिसे आज पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। आशु भाई गुरूजी है कौन और कैसे वो आसिफ से आशु भाई गुरूजी बना इसके पीछे की कहानी भी आपको चौंका देगी। आशु भाई गुरूजी उर्फ़ आसिफ खान 1990 में वजीरपुर की जेजे कॉलोनी में एक साइकिल रिपेयरिंग की दुकान चलाता था। बाद में वो दिल्ली के सराय रोहिल्ला में रहने लगा जहां वो खुद को ज्योतिषी बताता था। यहां से उसने दूसरों का भविष्य बताने का धंधा शुरू किया था।

इस धंधे में फायदा होते देख उसने अपनी दूकान बंद कर और टीवी चैनल्स की और रुख किया। टीवी के माध्यम से वो लोगों के भाग्य को सुधारने और बैड लक को खत्म करने का काम करने लगा। दो गवाहों के मुताबिक, जो उससे मिलने जाता था वो अपनी पहली मुलाकात के लिए 25000 रुपये की मोटी रकम लेता था और ये तो बस उसके काले धंधे का छोटा सा उदाहरण है। विडंबना ये है कि जब मोटी रकम लेने के बावजूद कई लोगों की मुश्किलें हल होती थी तब ये वहां से रातों-रात धंधा समेटकर फरार हो जाता था। यही नहीं वो इस धंधे से मिले पैसों को रियल स्टेट के धंधे में भी लगाता है। दूसरों का भविष्य बताने में फायदा होता देख इस बाबा ने रेप-धोखाधड़ी की घटनाओं को अंजाम दिया। इस बाबा की काली करतूतों की फेहरिस्त काफी लम्बी है।

अब सवाल ये है कि इस मामले में मीडिया का जुड़ाव कैसे है? क्या उनके हिंदूफोबिक रुख ने इस मामले से उन्हें जोड़ दिया है? बिना मामले की गहराई में जाए और जांच की रिपोर्ट आये बिना ही मीडिया ने एक धर्म पर हमला करना शुरू कर दिया। हम सभी जानते हैं कि कैसे मीडिया, बॉलीवुड के कुछ सितारों ने एक बलात्कारी की वजह से पूरे धर्म को ही निशाना बनाया था और जो भी कठुआ रेप मामले के तथाकथित रेप दोषियों का समर्थन करता उसे ‘रेपिस्ट अपोलोजिस्ट’ का नाम दे दिया गया था जबकि इस मामले में जो जांच के बाद सच सामने आया वो चार्जशीट पर कई सवाल खड़े कर रहा था।

जब भी कोई ढोंगी बाबा पकड़ा जाता है मीडिया हाउस उस बाबा के जरिये समाज में ये संदेश भेजने की कोशिश करती है कि ढोंग, पाखंड हिंदू धर्म का आदर्श है।

वास्तव में, ये समय ऐसा है कि लोगों को इस तरह के गुमराह करने वाले अंधविश्वास पर आंख मूंदकर भरोसा करना बंद करना चाहिए। यहां तक कि यदि मीडिया भी हिंदुफोबिया से जुड़ी चीजों को बढ़ावा न दें, यदि इस तरह की भ्रामक खबरें दिखाने वाली मीडिया एजेंसी  को सामाजिक या आर्थिक बहिष्कार का सामना करना पड़े तो शायद वो इस तरह की भ्रामक खबरों को बढ़ावा देना बंद कर दें। अब इसका निर्णय जनता के हाथ में है कि वो किन खबरों को महत्व देती है।

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