Nitesh Kumar Harne

Nitesh Kumar Harne
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साहित्य प्रेमी, राजनीति विशारद, गर्वान्वित भारतीय
हमारे देश में दो चीजे बार बार खतरे में आ जाती है। एक तो है “धर्मविशेष” जो पिछले कई दशकों से खतरे में न आये इसीलिए देश की पिछली सरकारों ने बड़े जतन से रखा हुआ था लेकिन 2014 के बाद...
2019 के आम चुनाव को बस एक साल का वक्त रह गया है ऐसे में सरकार समेत विपक्ष भी अपने तैयारी में जुट गया है। पक्ष विपक्ष अपनी अपनी चालें चलने लगे है। जहाँ एक ओर मोदी सरकार कुछ...
यमुना नदी के किनारे सफेद पत्थरों से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर 'ताजमहल' न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। शाहजहाँ – मुमताज के प्रेम की दास्तान को दर्शाता भव्य ताजमहल सुन्दरता का...
1 जनवरी को दलित संगठन, पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेना पर अंग्रेजों के शौर्य दिवस को हर साल धूमधाम से मनाते हैं। नए साल के मौके पर महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई को 200 वर्ष पूर्ण...
1 जनवरी 2018 को दलितों की पेशवाओं पर 200 वर्ष पुरानी विजय पर शौर्य दिवस का आयोजन रखा गया था जिसमे कुछ सुनियोजित हिंसा को अंजाम दिया गया और इस घटना को एक सोची समझी चाल के तहत ब्राहमण...
1947 को भले ही अंग्रेजों से हमें आजादी मिल गयी हो लेकिन अंग्रेजों की “फूट डालो और राज करो” कि नीति से आज भी देश जूझ रहा है। 200 साल तक अंग्रेजों इसी तरह हमें आपस में बाँट कर...
हिंदू धर्म में विवाह को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार माना गया है। विवाह = वि + वाह, अतः: इसका शाब्दिक अर्थ है - विशेष रूप से (उत्तरदायित्व का) वहन करना। पाणिग्रहण संस्कार को सामान्य रूप से हिंदू विवाह के नाम से जाना जाता है। अन्य धर्मों में विवाह पति और...
गुजरात चुनाव दिलचस्प तो है ही लेकिन कई मायनों में महत्वपूर्ण भी है बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए। इसीलिए दोनों पार्टी इस चुनाव में पूरी ताकत झोंकती दिखाई दी। गुजरात चुनाव पिछले 25 सालों में कभी भी इतने...
भारतीय रेल अपने समय से देरी से आने के लिए खासी जानी जाती रही है और इसके लिए भारतीय रेल मंत्रालय की हमेशा ही आलोचना भी होती रही है। इतना ही नहीं ट्रेन पटरी उखड़ जाने से अक्सर ट्रेन...
तीन तलाक का मुद्दा मुस्लिम महिलाओं के आज़ादी और आत्मसम्मान से जुड़ा है। यह पुरानी एवं एक रूढ़िवादी प्रथा है जिससे मुस्लिम महिलाओं को अनेक तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता रहा है। लेकिन अब देश में मुसलमानों...
राहुल गाँधी 2004 में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बने लेकिन वे हमेशा कांग्रेस पार्टी की तरह इस देश को भी अपनी जागीर ही समझते रहे इसलिए उन्होंने कभी राजनीति को गंभीरता से लिया ही नहीं। पुश्तैनी सीट से आसान...
प्रधानमंत्री मोदी भारतीय राजनीति के मंजे हुए खिलाडी है उन्हें ये भलीभांति पता होता है की उन्हें कब बोलना है, कितना बोलना है, क्या बोलना और कब नहीं बोलना है। जब उन्हें विरोधियों पर वार करना होता है तो...