मत

विश्लेषण

श्रेणी: इतिहास

उत्तरापथ और दक्षिणापथ: प्राचीन भारत का व्यापार मार्ग

आजादी के बाद इतिहासकारों ने रानीतिक और राजवंश में बदलाव से जुड़े इतिहास को बारीकी से नहीं खंगाला। बुनियादी ढांचे और राजनीतिक बदलावों के बीच के बिंदुओं को कभी जोड़ने की कोशिश नहीं की गयी। बिना किसी गहन जांच और तथ्यों की खोज की बजाय जोड़-तोड़ कर आंकलन करने पर जोर दिया गया। अपनी जरूरतों […]

विदर्भ पुरातात्विक खोज ने वाकाटक से जुड़ाव की की पुष्टि

उत्तर प्रदेश के बागपत में मिले शाही कब्रगाह और तीन शाही रथों की महत्वपूर्णखोज खोज के बाद भारतीय पुरातत्व विभाग ने विदर्भ क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण खोज की है। भारतीय इतिहास में रथों और घोड़ों के अस्तित्व पर संदेह को सुलझाने के लिए बागपत की खोज का अपना महत्व है। इस खोज ने ‘आर्यन […]

तो फिर ताजमहल है क्या – मकबरा या फिर हिन्दू मंदिर?

यमुना नदी के किनारे सफेद पत्थरों से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर ‘ताजमहल’ न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में अपनी पहचान बना चुका है। शाहजहाँ – मुमताज के प्रेम की दास्तान को दर्शाता भव्य ताजमहल सुन्दरता का अद्भुत नमूना है। ताजमहल को दुनिया के सात आश्चर्यों में शामिल किया गया है। हालांकि इस […]

नेहरु ने सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार को रोकने का हर संभव प्रयास किया. पर वह हार गया

सौराष्ट्र में वेरावल के निकट प्रभास पाटन पर सोमनाथ मंदिर एक ऐसा स्थान है जो आज धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में स्थित है, यह एक ऐसा मंदिर है जो यह दर्शाता है कि बुराई की ताकत कितनी भी अधिक हो, जीत धर्म की ही होगी। टूटकर, जलकर, छतिग्रस्त हो कर भी यह […]

क्या गाँधी वास्तव में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए खतरा थे?

स्कूल के दिनों में हमने भारत को आजाद कराने वाले लोगों के संघर्ष के बारे में अध्ययन करते हुए, मोहनदास करमचन्द गाँधी के गुणगानों को भी सुना और पढ़ा है। “दे दी हमें आजादी बिना खड़ग बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल” यह गीत उनकी प्रशंसा में लिखे गए सैंकड़ो गीतों में […]

हम्मीर सिंह सिसोदिया: वह राजपूत योद्धा जिसने समूचे राजपुताना के गौरव को पुनर्स्थापित किया

एक महान राजपूत योद्दा था जो बहुत बहादुर भी था और चतुर भी। उसने ना केवल मेवाड़ और उसकी राजधानी चित्तौड़ के सम्मान की रक्षा की, बल्कि वह पहला ऐसा योद्दा था जिसने दिल्ली में शासन करते हुए तुर्की सल्तनत का खात्मा किया। आज के स्वार्थी बुद्धिजीवी, जो स्वंय को भारत के प्रबुद्ध इतिहासकार होने […]

न चंगेज़ खान, न सिकंदर – ये हैं विश्व के सबसे सफल सम्राट

लेख के पाठकों को लेख का शीर्षक पढ़ कर शायद लगा हो कि लेख अगर चंगेज़ खान या सिकंदर जैसे किसी सफल चक्रवर्ती शासक के बारे में नहीं तो उनके किसी समकक्ष रजा महाराजा के बारे में होगा. किन्तु नहीं, यह लेख एक ऐसे महानुभाव पर आधारित है जिन्होंने प्रत्यक्ष रूप से तो भूमि के […]

जिंजी का किला: कैसे शिवाजी महाराज ने बीजापुर सल्तनत से जीत कर इसे एक अभेद्य किला बनाया

जिंजी किला तमिलनाडु में दक्षिण आर्कोट जिले के उत्तर-पश्चिमी कोने में स्थित हैं। यह अभेद्य किला वर्षो से लगातार राजवंशों के अनेक युध्दों को सहन करते हुए, और इस्लामी सल्तनत से लेकर शक्तिशाली फ्रांसीसी और ब्रिटिश साम्राज्य तक का सामना करता रहा। तीन पहाड़ियां – उत्तर में कृष्णागिरि, पश्चिम में राजगिरि और दक्षिण पूर्व में […]

वो युद्ध जब मराठाओं ने टीपू को बुरी तरह हराया, उसका किला जीता, और मोटी रकम वसूली

विन्द्य पर्वतमाला के दक्षिण में कभी भी किसी एक शक्ति का एकाधिकार नहीं रहा। अधिकांशतः इस क्षेत्र में विभिन्न शक्तियों के मध्य त्रिपक्षीय संघर्ष देखा गया है। इसमें से एक संघर्ष 10 वीं शताब्दी में चेरा, पांडिया या चोल राज्यों के मध्य हुआ और एक 18 वीं शताब्दी में निजाम, टीपू और मराठा राज्यों के […]

उसने नालंदा विश्वविद्यालय जलाया, हमने उसकी शान में शहर का नाम बदल दिया

पूरा उपमहाद्वीप इस बात को जानता है कि इस्लामिक शासन ने ‘स्वर्ण युग’ की कैसे शुरुआत की। समाज के कई वर्गों के बीच में पूर्ण शांति और सामंजस्य कैसे अस्तित्व में था। गैर मुसलमानों के खिलाफ कोई धार्मिक भेदभाव नहीं था। एक कदम आगे बढ़कर, स्मारक और शहरों के नाम उन्ही आक्रमणकारियों के नाम पर […]

किसानों के बड़े हितैषी, शिक्षाविद, समानता के प्रणेता परन्तु इतिहासकारों ने किया इतिहास से गायब

भारत देश की भूमि में अनेकों महानायको ने जन्म लिया है। महान समाजसुधारक, धर्म प्रवर्तक, योद्धा, साधु, संत, सन्यासी, क्रांतिकारी, देशप्रेमी, राष्ट्रवादी तरह के तमाम नायकों ने इस पवित्र भूमि को अपने अपने रक्त और कर्म से सींचा है। बहुत से ऐसे गुमनाम नायक रहें हैं जिनके साथ कभी इतिहास और इतिहास निर्माताओं ने न्याय […]

कभी सोचा है क्यों उड़ीशा का इतिहास स्कूलों में नहीं पढ़ाया जाता? क्योंकि ये सच बुद्धिजीवियों के लिए असहनीय है

इस लेख को अंग्रेजी में पढने के लिए यहाँ क्लिक करें  हजारों वर्ष पहले, महानदी के तट पर शिकार करते हुये केसरी वंश के एक राजकुमार अपने साथियों से काफी दूर चले गए। घंटों तक भटकने के बाद ये नदी पार कर एक दलदली द्वीप पर पहुंचे, जहां शास्त्रों के अनुसार इनहोने एक कबूतर को […]
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