मत

विश्लेषण

श्रेणी: टीऍफ़आईउवाच

क्या अमित शाह के निदेशक रहते हुए सहकारी बैंक में हुआ घोटाला? कांग्रेस के एक और प्रोपेगेंडा का हुआ खुलासा

नोटबंदी का फैसला 8 नवंबर 2016 में लिया गया था। इस फैसले के अगले ही दिन प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर में काफी भीड़ होने की वजह से सरकार ने सहकारी बैंक को 10 नवंबर 2016 को एक नोटिस जारी कर प्रतिबंधित नोटों को स्वीकार करने की अनुमति दी थी। लेकिन जल्द ही सरकार ने ये […]

आर्थिक सुधारों के लिए यूरेशिया समूह के अध्यक्ष ने की पीएम मोदी की तारीफ

विदेशी मीडिया ने एक बार नहीं बल्कि कई बार पीएम मोदी की तारीफ की है। कई संगठनों के विभिन्न प्रमुखों ने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत में सुधार नीतियों का समय-समय पर समर्थन किया है। नोटबंदी, जीएसटी जैसे सफल आर्थिक फैसला और मेक इन इंडिया जैसी नीतियों को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और अन्य […]

कुछ इस प्रकार ली शिक्षण जगत के इस सितारे ने रिटायरमेंट

जिसने भी 10+2 में विज्ञान को अपनाया है, वो इस किताब ‘कान्सैप्ट ऑफ फ़िज़िक्स’ न पढ़ा हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। ‘गीता’ की तरह ये आईआईटी/एआईपीएमटी के उम्मीदवारों के लिए ये पुस्तक पूज्य होती थी, जब परीक्षा के लिए फ़िज़िक्स तैयार करनी होती थी। इसे पूरा करने का अर्थ होता था की अपने मनचाहे […]

छात्र कल्याण के नाम पर हेराफेरी और पक्षपात, HCU छात्र संघ महासचिव का खुलासा

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की राजनीति में छात्र संघ महासचिव राजू कुमार साहू ने फिर से ला दिया भूचाल, वामदल के छात्रसंघ सदस्यों पर जमकर बोला हमला आप सभी की जानकारी के लिए बता दूँ कि कल हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्रसंघ का भंग होने का दिन था| जिसके लिए जनरल बॉडी मीटिंग को बुलायी गयी […]

आप कौन सी भाषा में सोंचते हैं?

15 अगस्त 1947 को हमारा देश आज़ाद हुआ. और आज़ादी के साथ ही यह प्रश्न उठा क़ि इस बहुभाषी, विविध संस्कृति समेटे राष्ट्र की राजभाषा क्या होगी ? संविधान सभा के सदस्यों के काफी विचार-विमर्श के बाद 14 सितंबर 1949 को निर्णय लिया गया जो क़ि भारत की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी. यह […]

[विडियो] जेएनयु के बाद अब पटना में भी “पाकिस्तान जिंदाबाद”

क्या जेएनयू के बाद पटना में भी देशविरोधी नारे लगाए गए? क्या राजधानी के अशोक राजपथ पर शुक्रवार अपराह्न जाकिर नाईक व असदुद्दीन ओवैसी के समर्थन में निकाले गए जुलूस में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए गए? ये सवाल कल पटना में चर्चा में था। जिस चीज़ की कल्पना शायद ही पटना के किसी बाशिंदे […]

आसमान का सीना चीर के आ गए, धरती की छाती फाड़ के आ गए – मेरे बब्बर-मसूद आ गए

मित्रों, राजनीति और नौटंकी का चोली दामन का साथ है। अजी यह न हो, तो जैसे दाल में नमक नहीं, गाड़ी में पेट्रोल नहीं, या यूं कहें, राजनीति में जान नहीं। पिछले पाँच छह सालों से राजनीति ने अनुसरण करने लायक आदर्श दिये हो या नहीं, नौटंकी तो नमक मिर्च लगा के स्पेशल डिमांड पर […]

जब तक माल्या है, तब तक मार्क्स और मार्क्सवाद है

एक 14 वर्ष के चरवाहे लड़के ने जब अपने पिता से पूछा कि पिता जी ये बारिश क्यों और कैसे होती है? तो पिता ने वैज्ञानिक कारण का ज्ञान होते हुए भी उसे एक काल्पनिक कहानी बतानी बहतर समझी क्योंकि इस कहानी के बाद प्रतिप्रश्न आने की संभावना बहुत की कम थी। पिता ने कहा […]

वामपंथ ही आधुनिक युग का ब्राह्मणवाद है

वामपंथ ही आधुनिक युग का ब्राह्मणवाद है बचपन से ही हम पढ़ते आ रहे हैं कि सदियों पहले से भारत एक ऐसा भू-खंड रहा है जो अपने प्राकृतिक संसाधनो एवं जलवायु विविधता कारण विदेशियों को आकर्षित करता रहा है | इसकी प्रारम्भिक कल्पना ही ऐसे तृतीय-विश्व साम्राज्य के तौर पर की गयी जिसके सभी निवासी […]

जेएनयु के देशद्रोहियों, तुम लोग बुद्धिजीवी नहीं, गन्दगी फैलाने वाले मच्छर हो

तुम लोग मच्छर हो। जवाहरलाल के नाम का ये विश्वविद्यालय कायरों की बस्ती है, बीमारी का अड्डा है। अपने आप को प्रबुद्ध समझने वाले ये लोग कीड़े हैं जो सिर्फ़ देश के टुकड़ों पर पलते हैं, और उस पर तुर्रा ये की देश को ही बीमार करने की कोशिश करते रहते हैं। ये मच्छर सिर्फ़ […]

क्या है रे तू मीडिया?

क्या है रे तू मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ या लोकतंत्र के आस्तित्व पर एक कटाक्ष उपालंभ तू निर्भय है या लज्जाहीन तू स्वतंत्र है या पराधीन तू नैतिकता का तराजू है या नैतिकता का अभिनय करता है तू समाचार है या अभिमतों का विनिमय करता है क्या है रे तू मीडिया अगर जो तू […]

मिलावट की माया

ज़ालिम ज़माने की मार से तंग आकर दिनोंदिन बढती महंगाई से घबरा कर हमने आत्महत्या की सोची फिर सोचा – ज़िन्दगी भूख में कटी है, अब भूखे क्यों मरें जब मरना ही है तो कुछ खाकर क्यों न मरें फिर काफ़ी सोच विचार कर तय किया कि मरा जाए ज़हर खाकर सोचा – अपने बजट […]

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